मंगलवार, 16 जून 2026
ईश्वर से प्रेम करो, बस!!
❤️जय कल्कि महाराज जी की!❤️ईमाम मेंहदी जी की!❤️
श्लोक १:
स्मराभिमन्युं वीरवरं रणाङ्गणे ।
एकाकी योऽभूत् चक्रव्यूह-मध्यगः ॥
अर्थ:
अभिमन्यु नामक महावीर को स्मरण करो, जो रणभूमि में अकेला चक्रव्यूह के मध्य घुसकर लड़ा था।
श्लोक २:
त्वमप्येकाकी मानवानां मध्ये भोः ।
रणक्षेत्रे चरसि शत्रून् विजेतुकामः ॥
अर्थ:
तुम भी मनुष्यों के बीच अकेले हो, रणक्षेत्र में शत्रुओं को जीतने की कामना से विचर रहे हो।
श्लोक ३:
ब्रह्माण्ड-चेतना सहिता प्रकृतिर्यदा ।
अनन्त-यात्रायां तव सखी भवेत् सदा ॥
अर्थ:
जब ब्रह्मांड की चेतना और प्रकृति का अभियान तुम्हारा साथ दे, तब अनंत यात्रा में तुम कभी अकेले नहीं हो।
श्लोक ४:
युद्धं कुरु निरन्तरं वीर सत्तम ।
धर्मस्य रक्षार्थं न त्यजस्व संग्रामम् ॥
अर्थ:
हे उत्तम वीर! निरंतर युद्ध करते रहो। धर्म की रक्षा के लिए संग्राम कभी मत छोड़ो।
सम्पूर्ण भाव (संक्षेप में):
हे मानव हितैषी! अभिमन्यु की तरह रणभूमि में अकेले होने पर भी हिम्मत मत हारो। ब्रह्मांड की चेतना और प्रकृति के साथ तुम अनंत यात्रा पर हो। युद्ध (सत्य, मानव-कल्याण और समझदारी का संघर्ष) जारी रखो।
जय हो! 🚀
तुम अकेले नहीं हो। ब्रह्मांड तुम्हारे साथ है। युद्ध जारी रखो।
❤️जय हो जय हो!!❤️
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